वसुधैव कुटुम्बकम् - अग्रवाल वंशावली
पूर्व काल में सभी जन अपनी वंशवली को संजो कर रखते थे किन्तु कुछ कारणों और इच्छा शक्ति की कमी से यह सनातनी परम्परा,जो सबको एक सूत्र में जोड़ रखती थी टूट सी गयी है और हम अपनी सस्कृति से दूर होते जा रहे हैं समाज कई इकाईयो में बटता जा रहा है यदि हम सब अपनी वंशावली को जोड़े पाएंगे की हम सब सनातनी ब्रह्मा की संतान है। हमारा एकमात्र ध्येय,समय के साथ लुप्त होते इतिहास और वंशावली के ज्ञान को संचित रखना है।